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राहुल गांधी मार्च पर CJI की सख्त टिप्पणी, 6 को नोटिस

✍️ Aajkibat📅 October 15, 2026Desh Videsh

राहुल गांधी मार्च को लेकर गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि कोई भी सुप्रीम कोर्ट को डरा-धमका नहीं सकता। अदालत ने राहुल गांधी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं को नोटिस जारी किया, जबकि SIR से जुड़ी याचिकाओं पर चुनाव आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जवाब मांगा।

राहुल गांधी मार्च पर सुनवाई, प्रतीकात्मक तस्वीर

राहुल गांधी मार्च: क्या है मामला?

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका दायर की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी सिलसिले में राहुल गांधी पैदल मार्च करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। वनइंडिया के अनुसार यह मार्च 12 अक्टूबर को हुआ था। मार्च और उस दौरान हुई गड़बड़ी से जुड़ी अलग याचिका पर भी अदालत ने सुनवाई की। राहुल गांधी मार्च का मामला इसलिए सुर्खियों में है कि इसमें अदालत परिसर में राजनीतिक गतिविधि पर सवाल उठे।

सुनवाई में CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत को पता है कि बाहर क्या कहा जा रहा है और अंदर क्या कहा जा रहा है। उनके मुताबिक न्यायपालिका इतनी कमजोर नहीं है कि कोई उसे डरा सके, और ऐसी कोशिशों पर कोई ध्यान नहीं देता। CJI ने राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से कहा कि राहुल गांधी को अपने आचरण पर स्पष्टीकरण देना होगा।

मार्च पर आपत्ति और विपक्ष का पक्ष

वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी मार्च पर आपत्ति जताते हुए इसे अदालत परिसर में राजनीतिक जुलूस बताया और कहा कि यह न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश है। उन्होंने करीब 200 वकीलों के हस्ताक्षर वाले एक बयान का भी जिक्र किया।

दूसरी ओर विपक्ष का आरोप है कि SIR में गड़बड़ियां हुई हैं और मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं। विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर चुके हैं। देखी गई रिपोर्ट्स में कांग्रेस या राहुल गांधी की ओर से मार्च पर उठी आपत्ति का कोई औपचारिक जवाब दर्ज नहीं है। चुनाव आयोग का पक्ष भी अभी सामने नहीं आया है।

SIR याचिका में क्या मांग है?

एक रिपोर्ट के अनुसार SIR याचिका में मतदाता सूची में हुए कथित बदलावों और नाम हटाने की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की गई है, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ और प्रतिष्ठित नागरिक शामिल हों। अदालत ने नई याचिकाओं को SIR पर पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है।

चुनाव आयोग नोटिस और बाकी नोटिस

रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग याचिकाओं पर ये नोटिस जारी किए:

  • SIR याचिकाओं पर: चुनाव आयोग नोटिस के तहत ECI, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी को जवाब देने को कहा गया।
  • मार्च और गड़बड़ी वाली याचिका पर: राहुल गांधी, कांग्रेस, मल्लिकार्जुन खड़गे, केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी, अखिलेश यादव और महुआ मोइत्रा को नोटिस।
  • जंतर-मंतर वाली याचिका पर: दिल्ली पुलिस के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में नोटिस।

अदालत ने पुलिस को प्रदर्शन से जुड़ी CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया और निजी पक्षों को भी सबूत के तौर पर वीडियो सुरक्षित रखने की अनुमति दी।

जंतर-मंतर पर भी नोटिस

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर आधारित नहीं था और इस बारे में एक समिति ने सुझाव दिया था। अदालत ने कहा कि वह पहले सरकार का जवाब सुनेगी और संतुष्ट न होने पर कानून के मुताबिक कदम उठाएगी।

आगे क्या होगा?

रिपोर्ट्स में अगली सुनवाई की तारीख नहीं बताई गई है। SIR की नई याचिकाएं पहले से लंबित मामलों के साथ सुनी जाएंगी। अब नजर चुनाव आयोग के जवाब और राहुल गांधी की ओर से स्पष्टीकरण पर रहेगी। राहुल गांधी मार्च से जुड़े मामले की अगली कार्यवाही का ब्योरा अदालत के आदेश की प्रति आने पर और साफ होगा।

राहुल गांधी मार्च पर जरूरी सवाल-जवाब

CJI सूर्यकांत ने मार्च पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि कोई भी सुप्रीम कोर्ट को डरा-धमका नहीं सकता और अदालत को पता है कि बाहर क्या कहा जा रहा है।

किन्हें नोटिस जारी हुआ?
मार्च वाली याचिका पर राहुल गांधी, कांग्रेस, खड़गे, केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी, अखिलेश यादव और महुआ मोइत्रा को, जबकि SIR याचिकाओं पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को।

SIR क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की मतदाता सूची की जांच और संशोधन की प्रक्रिया, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

यह रिपोर्ट अलग-अलग समाचार स्रोतों पर आधारित है और अदालत के आदेश की प्रति आने पर ब्योरे बदल सकते हैं। ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए पढ़ें देश-विदेश की ताजा खबरें और जुड़े रहें आज की बात के साथ।

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