
जामिया छात्र संघ चुनाव पर बड़ा बवाल! 12 दिन से भूख हड़ताल, विवादित नारों से बढ़ा तनाव
नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच विवादित नारों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। 12 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र 24 अक्टूबर को भी अपनी मांगों पर अड़े रहे। विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ जैसे नारे लिखे मिलने के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नारों को लेकर जांच और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की बात कही है।
12 अक्टूबर से जामिया छात्र संघ चुनाव की मांग पर आंदोलन
जामिया में छात्र संघ की बहाली और वर्ष 2026-27 के चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा की मांग को लेकर छात्रों ने 12 अक्टूबर को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र संघ की व्यवस्था बहाल होनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाया जा सके।
छात्रों ने भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित करने, आंदोलन से संबंधित अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और विश्वविद्यालय के मुख्य प्रॉक्टर व सुरक्षा सलाहकार को हटाने जैसी मांगें भी रखी हैं।
विवादित नारों से बढ़ा मामला
छात्र आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’, ‘फ्री शरजील इमाम’ और कुछ अन्य विवादित नारे लिखे मिलने की खबर सामने आई। इन नारों में RSS, ABVP और विश्वविद्यालय के कुलपति को निशाना बनाने वाले संदेश भी शामिल बताए गए हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस घटना की निंदा की है और कहा है कि नारों को लिखने वालों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। मामले के बाद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। हालांकि, भूख हड़ताल कर रहे छात्रों ने इन नारों से अपना संबंध होने से इनकार किया है और आरोप लगाया है कि इस विवाद के जरिए उनके आंदोलन को भटकाने की कोशिश की जा रही है। ये आरोप छात्रों के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
विश्वविद्यालय ने बनाई छात्र संघ संविधान समिति
आंदोलन के बीच जामिया प्रशासन ने छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति गठित की है। समिति को छात्र संघ के 2006 में भंग होने की परिस्थितियों, संबंधित न्यायिक फैसलों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, समिति को 20 दिसंबर 2026 तक मसौदा तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि छात्र संघ के चुनाव कराने से पहले संविधान और चुनाव की प्रक्रिया तय करना जरूरी है।
लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र इस कदम से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि संविधान तैयार करने की प्रक्रिया के साथ चुनाव की तारीख भी घोषित की जानी चाहिए।
भूख हड़ताल के बीच सांसदों को हिरासत में लिया गया
23 अक्टूबर को जामिया में प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने की कोशिश के दौरान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी समेत कई लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इस घटनाक्रम के बाद छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हुईं।
क्या अब घोषित होगा छात्र संघ चुनाव का कार्यक्रम?
24 अक्टूबर तक छात्रों की मुख्य मांग और विश्वविद्यालय के रुख के बीच सहमति नहीं बन पाई थी। विश्वविद्यालय की उच्चस्तरीय समिति ने छात्रों से आंदोलन समाप्त करने और संविधान बनाने वाली समिति के साथ सहयोग करने की अपील की है। समिति का कहना है कि संविधान और चुनावी व्यवस्था तैयार होने से पहले चुनाव की तारीख घोषित करना जल्दबाजी होगी।
वहीं, छात्र तत्काल चुनाव कार्यक्रम घोषित करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े मुद्दों का समाधान चाहते हैं। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है।
AajKiBaat.com अपडेट: जामिया छात्र संघ चुनाव, भूख हड़ताल और विवादित नारों से जुड़े घटनाक्रम पर आगे की जानकारी आधिकारिक घोषणा और विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर अपडेट की जाएगी।
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