
सौरव दास आशुतोष रांका रिहा: 50,000 बॉन्ड, क्राइम ब्रांच का समन
सौरव दास आशुतोष रांका रिहा हो गए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दोनों सह-संयोजकों को करीब एक हफ्ते की न्यायिक हिरासत के बाद बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 की रात तिहाड़ जेल से छोड़ा गया। दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने पुलिस की हिरासत बढ़ाने की मांग खारिज कर दी और कुछ शर्तों पर रिहाई का आदेश दिया। रिहाई के अगले दिन, गुरुवार 22 अक्टूबर को, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों को पूछताछ के लिए राजौरी गार्डन दफ्तर बुलाया है।

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सौरव दास आशुतोष रांका रिहा कैसे हुए?
रिपोर्ट के मुताबिक SEM अदालत ने कहा कि इस स्तर पर आगे न्यायिक हिरासत जरूरी नहीं लगती और एहतियाती मकसद बॉन्ड और लिखित वचन से पूरा हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार आदेश BNSS की धारा 135(3) के तहत दिया गया और मजिस्ट्रेट एसीपी ऋतु राज थे। बॉन्ड की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों को छोड़ा गया। इससे एक दिन पहले, 21 अक्टूबर को, दिल्ली हाईकोर्ट में उनकी याचिका वापस हो चुकी थी और अदालत ने उन्हें मजिस्ट्रेट के फैसले का इंतजार करने को कहा था।
अदालत ने कौन सी शर्तें रखीं?
रिपोर्ट्स के अनुसार रिहाई इन शर्तों पर हुई:
- दोनों के लिए ₹50,000 के निजी बॉन्ड और उतनी ही राशि के जमानती (श्योरिटी) बॉन्ड, जांच पूरी होने तक।
- शांति भंग करने वाली किसी भी गतिविधि से दूर रहने का लिखित वचन।
- जब तक जंतर-मंतर कानूनी प्रक्रिया से दोबारा अधिसूचित प्रदर्शन स्थल नहीं हो जाता, वहां प्रदर्शन का आह्वान न करना।
- भविष्य के प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में रखना।
- हर सुनवाई में हाजिर होना, जमानतदारों समेत।
- जांच अधिकारी की जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट अगली सुनवाई तक।
इंडिया टीवी की रिपोर्ट में बिना शर्त मौखिक माफी का भी जिक्र है। ओनमनोरमा के अनुसार बचाव पक्ष के वकील ने उस टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांगी जो जेल ले जाते समय CJP के एक अन्य सदस्य ने मीडिया से की थी, जिसे पुलिस ने अदालत की गरिमा के खिलाफ बताया था। अगली सुनवाई शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे है।
पुलिस ने अदालत में क्या कहा?
पुलिस ने तीन दिन की और न्यायिक हिरासत मांगी थी। उसकी दलील थी कि शांति भंग होने का खतरा बना हुआ है और नेताओं के अदालत में दिए बयानों और मीडिया में कही बातों में अंतर है। अदालत ने यह मांग नहीं मानी। इससे पहले 19 अक्टूबर के आदेश में अदालत ने हिरासत दो दिन बढ़ाई थी, जिसमें जमानतदारों के दस्तावेजों में गड़बड़ी का हवाला दिया गया था।
क्राइम ब्रांच का समन
ईटीवी भारत के अनुसार क्राइम ब्रांच ने सौरव दास, आशुतोष रांका और CJP के तीसरे कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे को गुरुवार दोपहर 12 बजे राजौरी गार्डन दफ्तर बुलाया है। मामला 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कथित अतिक्रमण का है। पुलिस का आरोप है कि समूह निजी परिसर के रास्ते अंदर घुसा, बैरिकेड तोड़े, सुरक्षाकर्मियों को रोका और शांति बनाए रखने की शर्तों का उल्लंघन किया। रिपोर्ट्स में मामला पहले संसद मार्ग थाने में दर्ज होकर बाद में क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने की बात है। ओनमनोरमा ने इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 का जिक्र किया है, जबकि अन्य रिपोर्ट्स में धाराएं नहीं बताई गईं। कहा गया है कि शिंदे जमानत बॉन्ड पर छोड़े जा चुके हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर था। यह एहतियाती और जांच की कार्यवाही है, किसी की दोषसिद्धि नहीं।
रिहाई पर प्रतिक्रियाएं
- अभिजीत दिपके (CJP संस्थापक): X पर दोनों को खुद से “बहुत-बहुत बड़ा” नेता बताया।
- रत्ना सिंह (CJP की कानूनी प्रमुख): कहा कि फैसला पहले आना चाहिए था, लेकिन आदेश का स्वागत किया।
- अरविंद केजरीवाल (AAP): कहा कि पूरा देश दोनों नेताओं के साथ खड़ा है।
- संबित पात्रा (BJP): कहा कि हिरासत तिरंगा फहराने की कोशिश से नहीं, बल्कि पीस बॉन्ड के कथित उल्लंघन से जुड़ी है।
जरूरी सवाल-जवाब
सौरव दास और आशुतोष रांका कब रिहा हुए?
बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 की रात, लगभग एक हफ्ते की हिरासत के बाद।
क्राइम ब्रांच ने उन्हें क्यों बुलाया?
13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कथित अतिक्रमण और शर्तों के उल्लंघन के मामले में पूछताछ के लिए।
अगली सुनवाई कब है?
23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे SEM अदालत में।
यह रिपोर्ट अलग-अलग समाचार स्रोतों पर आधारित है; ब्योरे अदालती कार्यवाही के साथ बदल सकते हैं। देश की ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए पढ़ें देश-विदेश की ताजा खबरें और जुड़े रहें आज की बात के साथ।
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