
नेहा बोरा रिहा: 5 घंटे घुमाने का आरोप, पुलिस का पक्ष
नेहा बोरा रिहा: AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 की सुबह रिहा कर दिया। उन्हें शुक्रवार शाम “लहरा दो तिरंगा” मार्च में जाते समय मंडी हाउस से हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने कहा कि रिहाई दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिकताएं पूरी होने के बाद हुई, जबकि AISA ने हिरासत के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

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नेहा बोरा रिहा: हिरासत से रिहाई तक क्या हुआ?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने का आह्वान किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक बोरा और CJP संस्थापक अभिजीत दिपके इसी ओर जा रहे थे, तभी दोनों को हिरासत में लिया गया। बोरा को मंडी हाउस पर और दिपके को जंडेवालान इलाके में रोका गया। बाद में दिपके की गिरफ्तारी हुई, जबकि बोरा को अगली सुबह छोड़ दिया गया। रिपोर्ट्स में बोरा पर किसी आरोप का जिक्र नहीं है। दिपके के मामले की पूरी जानकारी हमारी रिपोर्ट अभिजीत दिपके गिरफ्तार: 150 हिरासत में, कनॉट प्लेस में कड़ा पहरा में पढ़ी जा सकती है।
दिल्ली पुलिस हिरासत पर पुलिस का पक्ष
पुलिस के अनुसार कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक बनाए रखने के लिए करीब 150 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया। सेंट्रल पार्क को घेरा गया और वहां रैपिड एक्शन फोर्स तैनात की गई। पुलिस ने इन कदमों को जरूरी एहतियाती उपाय बताया है और कहा है कि बोरा को औपचारिकताएं पूरी करने के बाद छोड़ा गया। रिपोर्ट्स में AISA के विशिष्ट आरोपों पर पुलिस की अलग से कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं मिली।
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और संगठन के आरोप
आजतक के हवाले से AISA और बोरा ने ये दावे किए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है:
- बोरा को करीब 5 घंटे तक दिल्ली में अलग-अलग जगह घुमाया गया और फिर आरके पुरम थाने ले जाया गया। AISA के मुताबिक उन्हें पहले दक्षिण-पश्चिम दिल्ली की एक एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की सुविधा में ले जाया गया।
- वकील करीब आधी रात को आरके पुरम थाने में उनसे मिल सके। AISA और बोरा का कहना है कि वकीलों को 5-6 घंटे तक पहुंच नहीं मिली।
- बोरा का आरोप है कि पुलिस ने महिलाओं की हिरासत और रिहाई के तय नियमों का पालन नहीं किया।
- AISA के अनुसार उन्हें रिहाई का समय नहीं बताया गया और अस्वस्थ होने के बावजूद दवाइयां नहीं दी गईं।
- सुबह करीब 3 बजे वकील आदित्य कृष्णा ने कहा कि FIR की जानकारी नहीं है और उन्हें अगले दिन मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने की उम्मीद है।
बोरा ने रात भर हिरासत में रखकर अगली सुबह या शाम छोड़ देने की प्रथा के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग की मांग भी दोहराई।
हिरासत पर सवाल उठाने वाले नेता
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार कई नेताओं और संगठनों ने बोरा और दिपके की हिरासत पर सवाल उठाए। CPI(ML) लिबरेशन ने बोरा, दिपके और अन्य हिरासत में लिए गए लोगों की तत्काल रिहाई की मांग की। CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने बोरा की जगह बताने और परिवार व वकीलों से संपर्क की अनुमति देने को कहा। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने हिरासत को गैरकानूनी बताया और NCP-SCP प्रवक्ता अनीश गावंडे ने एहतियाती हिरासत को कानूनी रूप से अस्थिर करार दिया। देखी गई रिपोर्ट्स में सत्तापक्ष या भाजपा की ओर से इस पर कोई बयान नहीं मिला।
नेहा बोरा रिहा होने के बाद आगे क्या?
बोरा की रिहाई हो चुकी है, लेकिन हिरासत की प्रक्रिया पर उठे सवालों पर पुलिस का विस्तृत जवाब अभी रिपोर्ट्स में नहीं आया है। अब नजर इस पर रहेगी कि AISA इन आरोपों को लेकर कोई कानूनी कदम उठाता है या नहीं, और दिपके को SEM अदालत में पेश करने का क्या नतीजा निकलता है।
जरूरी सवाल-जवाब
नेहा बोरा कौन हैं?
AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) की राष्ट्रीय अध्यक्ष।
उन्हें कब रिहा किया गया?
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 की सुबह, पुलिस के अनुसार दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 की औपचारिकताओं के बाद।
AISA ने क्या आरोप लगाए?
5 घंटे अलग-अलग जगह घुमाने, वकीलों को देर से मिलने देने और दवाइयां न देने के आरोप, जो अभी सत्यापित नहीं हैं।
यह रिपोर्ट अलग-अलग समाचार स्रोतों पर आधारित है। देश की ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए पढ़ें देश-विदेश की ताजा खबरें और जुड़े रहें आज की बात के साथ।
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