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smartphone source code sharing साझा करने की कोई योजना नहीं, सरकार ने दी स्पष्ट सफाई

✍️ Aajkibat📅 January 12, 2026टैकनोलजी

smartphone source code sharing साझा कराने का कोई प्रस्ताव नहीं: सरकार

केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन इंडस्ट्री से जुड़े एक अहम और संवेदनशील मुद्दे पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। सरकार ने साफ शब्दों में कहा है किsmartphone source code sharing को लेकर ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, जिसके तहत स्मार्टफोन कंपनियों को अपना सोर्स कोड सरकार के साथ साझा करने के लिए बाध्य किया जाए।

यह स्पष्टीकरण उन अटकलों के बाद आया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि भारत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर खतरों के मद्देनजर मोबाइल फोन कंपनियों से सोर्स कोड मांग सकती है।


क्या होता है सोर्स कोड और क्यों है यह संवेदनशील?

Smartphone Source Code Sharing किसी भी सॉफ्टवेयर या ऑपरेटिंग सिस्टम की मूल संरचना होती है। स्मार्टफोन कंपनियों के लिए यह उनकी बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

अगर किसी कंपनी का सोर्स कोड साझा किया जाता है, तो

  • उसकी तकनीक की नकल का खतरा बढ़ सकता है
  • साइबर हमलों का जोखिम भी पैदा हो सकता है
  • वैश्विक व्यापार और निवेश पर नकारात्मक असर पड़ सकता है

इसी वजह से smartphone source code sharing को लेकर हमेशा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशीलता रही है।


विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

हाल के दिनों में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया चर्चाओं में दावा किया गया कि भारत सरकार स्मार्टफोन कंपनियों से सुरक्षा कारणों से सोर्स कोड एक्सेस पर विचार कर रही है। इससे

  • टेक इंडस्ट्री में चिंता बढ़ी
  • विदेशी निवेशकों में असमंजस पैदा हुआ
  • उपभोक्ताओं में प्राइवेसी को लेकर सवाल उठे

इन अटकलों के बाद सरकार को औपचारिक स्पष्टीकरण देना पड़ा।


सरकार ने क्या कहा?

सरकारी सूत्रों और संबंधित मंत्रालय ने साफ किया कि

  • स्मार्टफोन कंपनियों से सोर्स कोड साझा कराने का कोई प्रस्ताव नहीं है
  • न ही किसी नीति या कानून में ऐसा कोई प्रावधान किया गया है
  • कंपनियों की बौद्धिक संपदा और व्यावसायिक गोपनीयता का पूरा सम्मान किया जाएगा

सरकार ने कहा कि भारत एक निवेश-अनुकूल देश है और ऐसी कोई नीति नहीं लाई जाएगी जिससे उद्योग का भरोसा कमजोर पड़े।


डेटा सुरक्षा और साइबर सेफ्टी पर सरकार का रुख

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका फोकस

  • यूजर्स के डेटा की सुरक्षा
  • साइबर अपराधों पर रोक
  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने
    पर है, न कि smartphone source code sharing को अनिवार्य बनाने पर।

भारत में पहले से ही

  • IT Act
  • CERT-In गाइडलाइंस
  • Digital Personal Data Protection कानून

जैसे कई नियम मौजूद हैं, जो डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।


वैश्विक कंपनियों को क्यों मिली राहत?

सरकार की इस सफाई के बाद

  • Apple
  • Samsung
  • Google
  • Xiaomi
  • अन्य वैश्विक स्मार्टफोन ब्रांड्स

को बड़ी राहत मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत ऐसा कोई नियम लागू करता, तो इससे

  • विदेशी निवेश प्रभावित होता
  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर पड़ता
  • ‘मेक इन इंडिया’ जैसी योजनाओं को नुकसान होता

टेक इंडस्ट्री और एक्सपर्ट्स की राय

टेक विशेषज्ञों का कहना है कि

  • साइबर सुरक्षा जरूरी है
  • लेकिन सोर्स कोड साझा कराना अंतिम विकल्प होना चाहिए
  • बेहतर ऑडिट, सर्टिफिकेशन और सिक्योरिटी टेस्टिंग से भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है

भारत का मौजूदा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क इस दिशा में संतुलित माना जा रहा है।

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