
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर ने पकड़ी रफ्तार, 17 गांवों की जमीन पर बड़ा अपडेट; किसानों से रजिस्ट्री शुरू
MP News: Indore Pithampur Economic Corridorको लेकर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) ने परियोजना से जुड़ी जमीन के लिए किसानों से सहमति-पत्र लेने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल को इंदौर और पीथमपुर के बीच प्रस्तावित औद्योगिक कॉरिडोर को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भैंसलाय गांव से शुरू हुई रजिस्ट्री की प्रक्रिया
परियोजना के लिए जमीन जुटाने के उद्देश्य से संबंधित गांवों में किसानों और भू-स्वामियों से बातचीत की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, भैंसलाय गांव के दो किसानों ने अपनी 5.58 हेक्टेयर से अधिक जमीन MPIDC के नाम रजिस्ट्री कराई है। इसके बाद अन्य प्रभावित गांवों में भी जमीन की खरीद और रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है।
अधिकारियों की ओर से किसानों के साथ संवाद बढ़ाने और सहमति के आधार पर जमीन लेने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई जा सके।
17 गांवों की जमीन परियोजना के दायरे में
Indore Pithampur Economic Corridor के लिए करीब 20 किलोमीटर लंबा मार्ग प्रस्तावित है। इसकी चौड़ाई लगभग 75 मीटर रखे जाने की योजना है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना में 17 गांवों की करीब 3,200 एकड़ जमीन शामिल है। हालांकि, जमीन के सीमांकन, राजस्व रिकॉर्ड और अधिग्रहण से संबंधित आपत्तियों के कारण प्रक्रिया कुछ स्थानों पर चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
जमीन से जुड़े मामलों का समाधान और किसानों की सहमति इस परियोजना को समय पर आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसानों को जमीन के बदले क्या मिलेगा?
जमीन लेने की प्रक्रिया में भू-स्वामियों के हितों और मुआवजे का मुद्दा भी अहम है। रिपोर्ट के अनुसार, लैंड पूलिंग व्यवस्था के तहत पात्र जमीन मालिकों को अपनी जमीन के बदले 60 प्रतिशत विकसित भूखंड वापस पाने का विकल्प दिया जा सकता है। वहीं, नकद मुआवजा चाहने वाले किसानों के लिए सरकारी भूमि क्रय नीति के तहत भुगतान का विकल्प भी बताया गया है।
हालांकि, प्रत्येक किसान को मिलने वाला लाभ संबंधित नियमों, पात्रता और स्वीकृत शर्तों पर निर्भर करेगा। इसलिए जमीन से संबंधित किसी भी समझौते से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और मुआवजे की शर्तों की जानकारी लेना जरूरी है।
Indore Pithampur Economic Corridor के औद्योगिक विकास को मिलेगी गति
इंदौर-पीथमपुर क्षेत्र पहले से ही औद्योगिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित कॉरिडोर के तैयार होने पर दोनों औद्योगिक क्षेत्रों के बीच आवागमन और माल परिवहन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और नई औद्योगिक इकाइयों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योगों को परिवहन संबंधी सुविधाएं मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। हालांकि, इन लाभों की वास्तविक स्थिति कॉरिडोर के निर्माण, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार पर निर्भर करेगी।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल परियोजना के लिए जमीन की उपलब्धता और सहमति के आधार पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण है। शेष भूमि से जुड़े मामलों, किसानों की आपत्तियों और प्रशासनिक औपचारिकताओं के निपटारे के बाद निर्माण कार्य की प्रगति स्पष्ट हो सकेगी।
Indore Pithampur Economic Corridor को क्षेत्र के भविष्य के औद्योगिक विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में जमीन अधिग्रहण की रफ्तार और निर्माण संबंधी आधिकारिक अपडेट पर सभी की नजर रहेगी।
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