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सौरव दास आशुतोष रांका: HC से याचिका वापस, दिवाली तक CJP विराम

✍️ Aajkibat📅 October 21, 2026राजनीति

सौरव दास आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दोनों नेताओं ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन सुनवाई के दौरान याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने बिना मामले के गुण-दोष पर कोई राय दिए वापसी की अनुमति दी। इसी बीच CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने वीडियो जारी कर कहा कि दिवाली तक पार्टी कोई प्रदर्शन नहीं करेगी।

सौरव दास आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत मामले में अदालत की प्रतीकात्मक तस्वीर

सौरव दास आशुतोष रांका का मामला क्या है?

सौरव दास (27) और आशुतोष रांका (रिपोर्ट्स में 31 या 32) CJP के सह-संयोजक हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और मतदाता सूची पुनरीक्षण में कथित गड़बड़ियों को लेकर हो रहे प्रदर्शनों से जुड़े थे। लाइव लॉ के अनुसार घटनाक्रम कुछ इस तरह रहा:

  • 10 अक्टूबर: दोनों को एयरपोर्ट पर रोका गया और उसी दिन ₹50,000 के पीस बॉन्ड भरवाकर छोड़ा गया। कुछ रिपोर्ट्स में बॉन्ड की तारीख 11 अक्टूबर बताई गई है।
  • 11 अक्टूबर: जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया। इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और उस पर रोक नहीं है।
  • 13-14 अक्टूबर: पुलिस के आरोप के मुताबिक दोनों जंतर-मंतर पर बैरिकेड तोड़कर या गेट पर चढ़कर तिरंगा फहराने की कोशिश में हिरासत में लिए गए। रिपोर्ट्स में तारीख 13 और 14 अक्टूबर दोनों बताई गई है। 14 अक्टूबर को उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
  • 19 अक्टूबर: SEM ने हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कार्यवाही BNSS की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्रवाई के रूप में हुई है। यह किसी अपराध में दोषसिद्धि नहीं है। लाइव लॉ के अनुसार जांची गई रिपोर्ट में किसी FIR या दंड संहिता की धाराओं का जिक्र नहीं था।

SEM कोर्ट ने 19 अक्टूबर को क्या कहा?

स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने कहा कि दोनों को “कानून का सम्मान नहीं है” और शांति भंग होने की आशंका गंभीर है। अदालत के अनुसार पुलिस का आरोप था कि 11 अक्टूबर को दिए वादे के बावजूद दोनों ने सोशल मीडिया पर जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस जैसी जगहों पर प्रदर्शन के आह्वान किए। बचाव पक्ष ने 10 अक्टूबर के बाद ऐसे आह्वान से इनकार किया और भविष्य में ऐसा न करने का भरोसा दिया।

अदालत ने दोनों की ओर से दी गई जमानतें (श्योरिटी) भी खारिज कीं। आदेश के अनुसार एक जमानतदार की बॉन्ड वाली फोटो उसके आधार कार्ड से मेल नहीं खाई, जबकि दूसरा दास के बारे में बुनियादी जानकारी नहीं दे सका। अदालत ने नई जमानतें भरने के निर्देश दिए।

हाईकोर्ट में क्या हुआ?

वकील अभिक चिमनी के माध्यम से दाखिल रिट याचिका में 19 अक्टूबर का आदेश रद्द करने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं की दलीलें थीं कि जमानतें खारिज करना मनमाना और कानून के खिलाफ था और आदेश में भविष्य के किसी “आसन्न खतरे” का कारण नहीं बताया गया। याचिका में 2018 के दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देकर कहा गया कि सत्यापन लंबित रहने तक जमानत देने वाले को निजी बॉन्ड पर छोड़ा जाना चाहिए।

दिल्ली पुलिस की ओर से एएसजी चेतन शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने SEM के सामने जवाब दाखिल नहीं किया था और पहले के बॉन्ड की अनदेखी हुई। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने मौखिक टिप्पणियों में कहा कि उपयुक्त उपाय रिवीजन है, रिट नहीं, और पहले SEM की सुनवाई देखनी चाहिए। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने यह भी कहा कि बैरिकेड तोड़ने पर धारा 163 के उल्लंघन की आशंका बढ़ जाती है। एक घंटे से ज्यादा की सुनवाई के बाद याचिका वापस ले ली गई। अदालत ने कोई राय नहीं दी और सभी दलीलें खुली छोड़ीं।

अभिजीत दिपके का बयान: दिवाली तक प्रदर्शन नहीं

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार दिपके ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को करीब 16 मिनट का वीडियो संदेश X पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के बड़े फैसले सौरव दास और आशुतोष रांका लेते थे और वे उनके निर्देशों का पालन करते थे। उन्होंने दोनों को अपना भाई और परिवार बताया। समर्थकों से उन्होंने अपील की कि दिवाली तक वे प्रदर्शन से विराम लें और त्योहार परिवार के साथ बिताएं। न्यूजटैक की रिपोर्ट के अनुसार दिपके ने कहा कि पिछले 10-12 दिनों में कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को परेशानी झेलनी पड़ी और उन्होंने नफरत से दूर रहने की भी बात कही। दिवाली के बाद आंदोलन की योजना पर रिपोर्ट्स में कुछ नहीं बताया गया है।

CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने X पर कहा कि दोनों नेताओं को “एक मिनट भी जेल में” नहीं रहना चाहिए और राजनीतिक खेल के कारण उनकी आजादी नहीं छीनी जानी चाहिए। IANS के अनुसार यह बयान मंगलवार को आया।

आगे क्या होगा?

दोनों नेताओं की दो दिन की बढ़ी हुई हिरासत 21 अक्टूबर को खत्म होनी थी और उन्हें SEM कोर्ट में पेश किया जाना था, जहां जमानतों पर दोबारा विचार होना था। रिपोर्ट्स में सुनवाई का समय दोपहर 2 बजे और शाम 4 बजे, दोनों बताया गया है। इस सुनवाई का नतीजा, यानी दोनों की रिहाई हुई या नहीं, जांची गई रिपोर्ट्स में सामने नहीं आया है। हाईकोर्ट की सलाह के अनुसार राहत न मिलने पर वे रिवीजन अदालत जा सकते हैं।

जरूरी सवाल-जवाब

सौरव दास और आशुतोष रांका कौन हैं?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक।

हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
कोई फैसला नहीं। याचिका वापस ली गई और अदालत ने गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी।

क्या CJP दिवाली तक प्रदर्शन करेगी?
अभिजीत दिपके के अनुसार नहीं, उन्होंने समर्थकों से विराम लेने को कहा है।

यह रिपोर्ट अलग-अलग समाचार स्रोतों पर आधारित है; तारीखों और समय के ब्योरे अलग-अलग रिपोर्ट्स में थोड़े अलग हैं और अदालती कार्यवाही के साथ बदल सकते हैं। देश की ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए पढ़ें देश-विदेश की ताजा खबरें और जुड़े रहें आज की बात के साथ।

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