पृथ्वी पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव
यदि यह सोलर फ्लेयर पृथ्वी की दिशा में सक्रिय होती है, तो इसके कई असर देखे जा सकते हैं:
- सैटेलाइट संचार में बाधा
- GPS और नेविगेशन सिस्टम प्रभावित
- रेडियो कम्युनिकेशन में रुकावट
- पावर ग्रिड में अस्थायी उतार-चढ़ाव
- ध्रुवीय क्षेत्रों में ऑरोरा की तीव्रता बढ़ना
हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल किसी बड़े नुकसान का खतरा नहीं है, लेकिन स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
नासा और अन्य एजेंसियों की तैयारी
नासा, ESA और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्पेस एजेंसियां सूर्य की गतिविधियों पर 24×7 नजर रख रही हैं। जरूरत पड़ने पर सैटेलाइट ऑपरेटर्स और पावर कंपनियों को चेतावनी दी जाती है, ताकि वे एहतियाती कदम उठा सकें और नुकसान से बचा जा सके।
सोलर साइकिल और बढ़ती गतिविधि
वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य इस समय अपने सोलर साइकिल के एक्टिव फेज में है। इस चरण में सोलर फ्लेयर और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) जैसी घटनाएं अधिक बार होती हैं। आने वाले महीनों में सूर्य की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
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