यहाँ इस घटनाक्रम पर आधारित विस्तृत समाचार रिपोर्ट दी गई है:
स्वच्छ शहर के दामन पर दाग: CM मोहन यादव का बड़ा एक्शन
प्रमुख कार्रवाईयाँ:
- आयुक्त (Commissioner) को नोटिस: नगर निगम कमिश्नर को कार्य में लापरवाही और निगरानी की कमी के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
- अपर आयुक्त (Additional Commissioner) हटाए गए: प्रशासनिक व्यवस्था में फेरबदल करते हुए अपर आयुक्त को पद से हटा दिया गया है।
- लापरवाह इंजीनियर बर्खास्त: जांच में दोषी पाए गए और कार्यों में भारी लापरवाही बरतने वाले इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त (Dismiss) करने के आदेश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
इंदौर नगर निगम में पिछले कुछ समय से ड्रेनेज और निर्माण कार्यों के नाम पर बिना काम किए ही करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला सुर्खियों में रहा है। लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक के इस घोटाले में कई निजी फर्मों और निगम के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है।
“सबसे स्वच्छ शहर के दामन पे धब्बा”
इंदौर ने लगातार 7 बार स्वच्छता का खिताब जीतकर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। लेकिन हालिया घोटालों ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यह “सफेदपोश भ्रष्टाचार” शहर की मेहनत से कमाई गई छवि को नुकसान पहुँचा रहा है।
मुख्यमंत्री का संदेश: “भ्रष्टाचार के विरुद्ध हमारी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वाला कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बख्शा नहीं जाएगा।”
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