
देश में मौसम का डबल अटैक: उत्तर भारत में लू, पहाड़ी राज्यों में बारिश और ओले
देश इस समय मौसम के दोहरे असर का सामना कर रहा है। एक तरफ उत्तर और मध्य भारत भीषण गर्मी और लू से झुलस रहा है, तो दूसरी तरफ पहाड़ी राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में कई राज्यों में मौसम तेजी से बदल सकता है, और यह बदलाव सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं रहेगा — कृषि, यात्रा, बिजली खपत और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी इसका सीधा असर दिखने लगा है।
दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों में तापमान लगातार 44 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आ रही हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। बाजारों में सुबह 11 बजे के बाद से ही चहल-पहल कम हो जाती है, और दुकानदार दोपहर में दुकानें बंद रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय चल रहा नौतपा 2026 गर्मी को और अधिक बढ़ा रहा है। सूर्य की सीधी किरणों और शुष्क हवाओं के कारण हीटवेव का असर कई राज्यों में खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सबसे सीधे और तेज पड़ती हैं, जिससे जमीन और हवा दोनों जल्दी गर्म होते हैं — यही वजह है कि इन नौ दिनों में तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री ज्यादा महसूस होता है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर?
राजस्थान के चूरू, बीकानेर और जोधपुर जैसे इलाकों में तापमान 47 डिग्री तक पहुंचने की खबरें हैं। मध्य प्रदेश में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र और उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड बेल्ट खासतौर पर प्रभावित है। दिल्ली-NCR में भी लू का असर लगातार तीसरे हफ्ते बना हुआ है, जिसके चलते कई स्कूलों ने अपने समय में बदलाव किया है और कुछ जिलों में आउटडोर एक्टिविटी पर अनौपचारिक रोक लगा दी गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने, धूप में निकलने से बचने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से जितना बचा जाए, उतना बेहतर है — इस दौरान हीटस्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
हीटवेव से बचने के आसान उपाय
- दिनभर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं, साथ में नींबू पानी, छाछ या नारियल पानी जैसे तरल पदार्थ लें
- हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें, सिर को टोपी या गमछे से ढककर रखें
- घर से निकलते समय छाया वाला रास्ता चुनें और जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकलें
- तेज चाय-कॉफी और ज्यादा तला-भुना खाने से परहेज करें, हल्का और सुपाच्य भोजन लें
- घर के पंखे-कूलर की हवा सीधे शरीर पर ज्यादा देर न लें, बीच-बीच में ब्रेक लें
उत्तर भारत में भीषण हीटवेव का कहर, पहाड़ों पर बारिश-ओलों का अलर्ट; मौसम ने दिखाए दो रंग
वहीं दूसरी ओर पहाड़ी राज्यों में मौसम करवट लेता नजर आ रहा है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में येलो अलर्ट भी जारी किया है। शिमला, मनाली और नैनीताल जैसे पर्यटन स्थलों पर अचानक मौसम बदलने से सैलानियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि पहाड़ी रास्तों पर बारिश के दौरान फिसलन और लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से पहाड़ी इलाकों में मौसम बदल रहा है। यह एक ऐसी मौसमी प्रणाली है जो भूमध्य सागर से चलकर पश्चिमी हिमालय क्षेत्र की ओर बढ़ती है और रास्ते में नमी जुटाकर बारिश व बर्फबारी का कारण बनती है। इससे तापमान में गिरावट आने की संभावना है, लेकिन खराब मौसम के कारण यात्रा और जनजीवन प्रभावित हो सकता है — खासकर उन इलाकों में जहां सड़कें पहले से संकरी और पहाड़ी हैं।
इस बीच दक्षिण भारत से राहत भरी खबर भी सामने आई है। केरल में मानसून के समय से पहले पहुंचने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार 26 मई के आसपास मानसून केरल में दस्तक दे सकता है, जिससे देश के कई हिस्सों को जल्द गर्मी से राहत मिल सकती है। आम तौर पर केरल में मानसून 1 जून के आसपास पहुंचता है, इसलिए इस बार समय से पहले एंट्री को मौसम विज्ञानी सकारात्मक संकेत मान रहे हैं — हालांकि उत्तर भारत तक मानसून पहुंचने में अभी भी 3-4 हफ्तों का वक्त लग सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. नौतपा क्या है और यह कब तक रहेगा?
नौतपा सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन से जुड़ी एक पारंपरिक मौसमी अवधि है, जो हर साल मई के अंत में लगभग नौ दिनों तक चलती है। इस दौरान तापमान सामान्य से ज्यादा रहता है।
2. क्या मानसून समय पर भारत पहुंचेगा?
केरल में मानसून के समय से पहले पहुंचने के संकेत हैं, लेकिन उत्तर भारत में मानसून पहुंचने में अभी कुछ हफ्तों का समय लग सकता है।
3. हीटवेव के दौरान सबसे ज्यादा खतरा किसे है?
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार (खासकर हृदय व किडनी रोगियों) को हीटस्ट्रोक का खतरा सबसे अधिक रहता है।
मौसम विभाग ने लोगों को लगातार अपडेट पर नजर रखने और सावधानी बरतने की सलाह दी है। खासतौर पर हीटवेव वाले इलाकों में दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने की चेतावनी जारी की गई है, जबकि पहाड़ी राज्यों के यात्रियों को मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा की योजना बनाने को कहा गया है।





