UPSC parikshaon mein ab ai aadharit होगा फेस ऑथेंटिकेशन, सभी अभ्यर्थियों के लिए नया नियम लागू

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UPSC Parikshaon Mein Ab Ai Aadharit

UPSC parikshaon mein ab ai aadharit फेशियल रिकग्निशन पहचान में लगेंगे मात्र 8-10 सेकंड

नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) अपनी भर्ती परीक्षाओं की शुचिता और सुरक्षा को और कड़ा करने के लिए एक अत्याधुनिक कदम उठाने जा रहा है। आयोग ने घोषणा की है कि भविष्य में आयोजित होने वाली सभी परीक्षाओं में उम्मीदवारों का एआई-सक्षम फेशियल ऑथेंटिकेशन (चेहरा प्रमाणीकरण) किया जाएगा।

आयोग ने वर्ष 2025 में आयोजित एनडीए (NDA), नेवल एकेडमी (NA) और सीडीएस (CDS) परीक्षाओं के दौरान गुरुग्राम के चुनिंदा केंद्रों पर इसका सफल पायलट प्रोजेक्ट पूरा किया। इस तकनीक के परिणाम उत्साहजनक रहे हैं:

  • त्वरित सत्यापन: प्रत्येक उम्मीदवार के सत्यापन में औसतन केवल 8 से 10 सेकंड का समय लगा।
  • सटीक मिलान: पंजीकरण के समय जमा की गई फोटो का परीक्षा केंद्र पर लाइव इमेज से डिजिटल मिलान किया गया।
  • पारदर्शिता: यूपीएससी अध्यक्ष अजय कुमार के अनुसार, इससे प्रवेश प्रक्रिया सुगम हुई है और सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जुड़ी है।

पूर्व सैनिक दिवस (14 जनवरी): वर्दी उतारने के बाद भी जारी रहने वाली सेवा

14 जनवरी का दिन भारत में किसी शोर-शराबे वाले उत्सव की तरह नहीं, बल्कि एक शांत सम्मान की तरह आता है। यह उन पुरुषों और महिलाओं के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है जिन्होंने दशकों तक देश की सेवा की।

एक पहचान जो कभी खत्म नहीं होती

सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के लिए यह दिन केवल पुरानी यादों का नहीं, बल्कि उस विरासत का है जिसे वे आज भी संजोए हुए हैं। लेफ्टिनेंट जनरल मोहन दास (सेवानिवृत्त) कहते हैं, “अकादमी में हम लड़कों से पुरुष बनना सीखते हैं और रेजिमेंट में हम इंसानों का नेतृत्व करना सीखते हैं।”

वहीं, ब्रिगेडियर बाकिर शमीम (सेवानिवृत्त), जो अब एक अमेरिकी नागरिक हैं, इस अटूट बंधन को साझा करते हुए कहते हैं कि शरीर चाहे कहीं भी हो, दिल हमेशा भारतीय सेना में ही रहता है। उनके अनुसार, सेना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक निकटतम परिवार है।

सेवा की शांत और अदृश्य कीमत

सैनिकों का जीवन केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है। कर्नल आर.पी. जौहरी (सेवानिवृत्त) उस ‘अनुपस्थिति’ की बात करते हैं जो एक सैनिक का परिवार झेलता है। देश की सुरक्षा के लिए उन्होंने अपने दोस्तों के साथ बिताए जाने वाले सुख-सुविधाओं के पलों और पारिवारिक मील के पत्थरों का त्याग किया। उनके अनुसार, यह त्याग बिना किसी कड़वाहट के, केवल देशभक्ति के अटूट भाव से किया गया।

मानवीय संवेदनाओं की मिसाल

सेना केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करती, बल्कि अपने लोगों की देखभाल भी करती है। ब्रिगेडियर शमीम नागालैंड की एक घटना याद करते हैं जहाँ रेजिमेंट के जवानों ने एक शहीद की विधवा के लिए दो महीने के भीतर घर बना दिया था। वह विधवा हर पखवाड़े सैनिकों के लिए केक लाती थी—वह केक किसी मेडल से कम नहीं था।

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