10 shal me bhartiy punji market में ऐतिहासिक उछाल, FY26 में 311 IPOs से ₹1.7 लाख करोड़: SEBI प्रमुख
यहाँ चेन्नई में आयोजित ‘एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंजेस मेंबर्स ऑफ इंडिया’ (ANMI) के 15वें अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार सम्मेलन 2026 में सेबी (SEBI) अध्यक्ष के संबोधन का हिंदी सारांश है:
भारतीय पूंजी बाजार में जबरदस्त उछाल: सेबी अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने चेन्नई में आयोजित ANMI के 15वें अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार सम्मेलन 2026 में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने भारतीय पूंजी बाजार के तेजी से विस्तार और नियामक ढांचे में सुधारों पर चर्चा की।
बाजार का विस्तार और निवेशकों की बढ़ती संख्या
पांडेय ने बताया कि भारत का पूंजी बाजार इक्विटी, डेरिवेटिव्स, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs), इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) और कॉर्पोरेट बॉन्ड सहित सभी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है।
- निवेशकों में वृद्धि: विशिष्ट (unique) निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2020 के 4.3 करोड़ से बढ़कर आज 13.7 करोड़ हो गई है।
- इस वित्तीय वर्ष के पहले नौ महीनों में भी बाजार में मजबूत गतिविधियां देखी गई हैं।
सशक्त नियामक ढांचा और अनुपालन में ढील
सेबी अध्यक्ष ने एक ऐसी “स्मार्ट नियामक वास्तुकला” (smarter regulatory architecture) बनाने पर जोर दिया, जो निवेशकों की सुरक्षा और बाजार की अखंडता को बनाए रखते हुए अनुपालन (compliance) प्रक्रिया को सरल बनाए।
प्रमुख घोषणाएँ:
- स्टॉकब्रोकर रेगुलेशन 2026: हाल ही में अधिसूचित इन नियमों के तहत ब्रोकरों को अन्य वित्तीय क्षेत्र के नियामकों द्वारा देखे जाने वाले कार्यों में विविधता लाने की अनुमति दी गई है, बशर्ते वे निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें।
- तकनीकी खामियों पर नया फ्रेमवर्क: शेयर दलालों के ट्रेडिंग सिस्टम में आने वाली तकनीकी समस्याओं (technical glitches) के समाधान के लिए शुक्रवार को एक संशोधित ढांचा जारी किया गया।
ब्रोकरों के लिए राहत के उपाय
नए फ्रेमवर्क के तहत पात्रता मानदंडों में बदलाव किया गया है, जिससे छोटे ब्रोकरों पर बोझ कम होगा:
- नई पात्रता: अब यह ढांचा केवल उन स्टॉक ब्रोकरों पर लागू होगा जिनके पास 10,000 से अधिक पंजीकृत ग्राहक हैं।
- 60% ब्रोकरों को लाभ: इस नए मानदंड के कारण लगभग 60% स्टॉक ब्रोकर इस फ्रेमवर्क के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे उनकी समग्र अनुपालन आवश्यकताओं में कमी आएगी।
- रिपोर्टिंग में ढील: तकनीकी गड़बड़ियों की रिपोर्ट करने की समय सीमा को एक घंटे से बढ़ाकर दो घंटे कर दिया गया है, जिससे रिपोर्टिंग की प्रक्रिया आसान हो सके।







