India EU FTA talks, किसानों और MSMEs के हितों की सुरक्षा पर सहमति

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India EU FTA talks

India EU FTA talks वार्ता फिर तेज, किसानों और MSMEs की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर ब्रसेल्स में अहम बातचीत हुई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की इस यात्रा ने व्यापारिक रिश्तों को एक नई दिशा दी है, खासकर 26 जनवरी को होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह और भारत-EU शिखर सम्मेलन से पहले।

भारत-EU व्यापार वार्ता: किसानों और छोटे उद्योगों के हितों की सुरक्षा पर जोर

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त मारोस सेफकोविच के बीच ब्रसेल्स में उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा समझौता तैयार करना है जो दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हो और भारतीय उद्योगों को ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनाए।

बैठक के प्रमुख बिंदु:

  • नियम-आधारित व्यापार: दोनों पक्षों ने एक आधुनिक आर्थिक साझेदारी और नियमों पर आधारित व्यापार ढांचे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
  • हितों की रक्षा: मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि समझौते में किसानों और MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।
  • कठिन दौर में बातचीत: भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, वार्ता अब अपने “सबसे कठिन” चरण में पहुँच गई है, जहाँ दोनों पक्ष मतभेदों को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

दोनों पक्षों की मुख्य मांगें:

पक्षमुख्य मांग/झुकाव
भारतटेक्सटाइल (कपड़ा) और लेदर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए जीरो-ड्यूटी पहुंच।
यूरोपीय संघ (EU)ऑटोमोबाइल, मेडिकल डिवाइस, वाइन, मीट और पोल्ट्री पर आयात शुल्क में भारी कटौती।

आगामी कार्यक्रम और महत्व

यह बातचीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  1. 26 जनवरी: यूरोपीय संघ का शीर्ष नेतृत्व गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होगा।
  2. 27 जनवरी: नई दिल्ली में भारत-EU शिखर सम्मेलन आयोजित होने की संभावना है, जिसमें इस समझौते पर बड़ी घोषणा हो सकती है।

आर्थिक आंकड़े (2024-25)

  • कुल द्विपक्षीय व्यापार: 136.53 बिलियन अमेरिकी डॉलर।
  • भारतीय निर्यात: 75.85 बिलियन डॉलर (EU भारत का सबसे बड़ा माल व्यापार भागीदार है)।
  • लाभ: यदि यह समझौता सफल होता है, तो भारत के रेडीमेड गारमेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स और स्टील जैसे उत्पाद यूरोपीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।

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