भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच $3 अरब डॉलर का LNG समझौता| India UAE LNG Deal
सोमवार को भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) खरीदने के लिए $3 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस सौदे के साथ ही भारत, UAE का सबसे बड़ा ग्राहक बन गया है। दोनों देशों के नेताओं ने व्यापार और रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए बातचीत भी की।| India UAE LNG Deal
यहाँ इस घटनाक्रम के मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
1. ऐतिहासिक समझौता और द्विपक्षीय वार्ता
- यह समझौता UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत की बेहद संक्षिप्त (दो घंटे की) यात्रा के दौरान हुआ, जहाँ उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चर्चा की।| India UAE LNG Deal दोनों नेताओं ने अगले छह वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर $200 अरब डॉलर तक ले जाने और एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी (Strategic Defence Partnership) बनाने का संकल्प लिया।
2. ऊर्जा समझौते का विवरण
- अबू धाबी की सरकारी कंपनी एडनॉक गैस (ADNOC Gas) और भारत की हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प (HPCL) के बीच यह समझौता हुआ है।
- इसके तहत, ADNOC अगले 10 वर्षों तक भारत को सालाना 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG की आपूर्ति करेगी।
- ADNOC गैस ने कहा कि इस समझौते के बाद भारत के साथ उनके कुल अनुबंधों का मूल्य $20 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। कंपनी ने बयान दिया, “भारत अब UAE का सबसे बड़ा ग्राहक है और ADNOC गैस की LNG रणनीति का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।”
3. रक्षा और भू-राजनीतिक संदर्भ
India UAE LNG Deal|भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। शेख मोहम्मद के साथ एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल भी आया था, जिसमें उनके रक्षा और विदेश मंत्री शामिल थे। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि दोनों पक्षों ने एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी बनाने की दिशा में काम करने के लिए एक ‘आशय पत्र’ (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर किए हैं।
4. क्षेत्रीय समीकरण और पाकिस्तान का कोण
- यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत के चिर-प्रतिद्वंद्वी पड़ोसी, पाकिस्तान ने पिछले साल सऊदी अरब के साथ एक आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
- हाल ही में, एक पाकिस्तानी मंत्री ने पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते के मसौदे की तैयारी की घोषणा भी की थी।
- गौर करने वाली बात यह है कि सऊदी अरब और UAE, जो वर्षों तक करीबी सहयोगी रहे हैं, अब क्षेत्रीय नीतियों (जैसे यमन संघर्ष) और तेल उत्पादन को लेकर अलग-अलग रास्ते अपना रहे हैं।
5. भारत का रुख विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया कि UAE के साथ ‘आशय पत्र’ पर हस्ताक्षर करने का मतलब यह नहीं है कि भारत क्षेत्रीय संघर्षों में शामिल होगा।







