Sun strong flare| सूर्य से निकली शक्तिशाली सोलर फ्लेयर, अंतरिक्ष मौसम को लेकर वैज्ञानिक सतर्क

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Sun strong flare

Sun strong flare| सूर्य से शक्तिशाली सोलर फ्लेयर जारी, अंतरिक्ष मौसम पर असर की आशंका

खगोल वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि सूर्य से हाल ही में एक शक्तिशाली सोलर फ्लेयर निकली है, जिसे अब तक की हालिया गतिविधियों में सबसे तीव्र माना जा रहा है। इस घटना के बाद अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) को लेकर दुनिया भर की स्पेस एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। सोलर फ्लेयर सूर्य की सतह पर होने वाला अचानक ऊर्जा विस्फोट होता है, जिससे भारी मात्रा में रेडिएशन और चार्ज्ड पार्टिकल्स अंतरिक्ष में फैलते हैं।


Sun strong flare| सोलर फ्लेयर क्या होता है?

सोलर फ्लेयर सूर्य के वातावरण में जमा चुंबकीय ऊर्जा के अचानक मुक्त होने से पैदा होता है। इसके दौरान एक्स-रे और अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन तेजी से अंतरिक्ष में फैलता है। वैज्ञानिक सोलर फ्लेयर्स को उनकी तीव्रता के आधार पर वर्गीकृत करते हैं, जिनमें X-क्लास फ्लेयर सबसे शक्तिशाली माने जाते हैं।


पृथ्वी पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव

यदि यह सोलर फ्लेयर पृथ्वी की दिशा में सक्रिय होती है, तो इसके कई असर देखे जा सकते हैं:

  • सैटेलाइट संचार में बाधा
  • GPS और नेविगेशन सिस्टम प्रभावित
  • रेडियो कम्युनिकेशन में रुकावट
  • पावर ग्रिड में अस्थायी उतार-चढ़ाव
  • ध्रुवीय क्षेत्रों में ऑरोरा की तीव्रता बढ़ना

हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल किसी बड़े नुकसान का खतरा नहीं है, लेकिन स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।


Sun strong flare| स्पेस वेदर अलर्ट क्यों जरूरी?

अंतरिक्ष मौसम का सीधा असर आधुनिक टेक्नोलॉजी पर पड़ता है। आज के समय में सैटेलाइट, इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क और एयर ट्रैफिक कंट्रोल काफी हद तक अंतरिक्ष पर निर्भर हैं। इसी वजह से सोलर फ्लेयर जैसी घटनाओं के दौरान स्पेस वेदर अलर्ट जारी करना बेहद जरूरी हो जाता है।


नासा और अन्य एजेंसियों की तैयारी

नासा, ESA और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्पेस एजेंसियां सूर्य की गतिविधियों पर 24×7 नजर रख रही हैं। जरूरत पड़ने पर सैटेलाइट ऑपरेटर्स और पावर कंपनियों को चेतावनी दी जाती है, ताकि वे एहतियाती कदम उठा सकें और नुकसान से बचा जा सके।


सोलर साइकिल और बढ़ती गतिविधि

वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य इस समय अपने सोलर साइकिल के एक्टिव फेज में है। इस चरण में सोलर फ्लेयर और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) जैसी घटनाएं अधिक बार होती हैं। आने वाले महीनों में सूर्य की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।

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