Nipah virus outbreak: यह दिमाग पर कैसे करता है हमला और खुद को सुरक्षित कैसे रखें

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Nipah Virus Outbreak

Nipah virus outbreak: दिमाग पर असर, लक्षण और बचाव के जरूरी उपाय

नई दिल्ली: देश में एक बार फिर Nipah virus outbreak को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह वायरस दुर्लभ जरूर है, लेकिन बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह सीधे इंसान के दिमाग (Brain) को प्रभावित करता है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक निपाह वायरस की संक्रमण दर कम होने के बावजूद इसकी मृत्यु दर काफी अधिक हो सकती है, इसलिए सतर्कता बेहद ज़रूरी है।


निपाह वायरस क्या है?

निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसका पहला मामला 1999 में मलेशिया में सामने आया था। भारत में केरल जैसे राज्यों में इसके मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

यह वायरस मुख्य रूप से

  • फलों को खाने वाले चमगादड़ों (Fruit Bats)
  • संक्रमित जानवरों
  • या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैल सकता है।

निपाह वायरस दिमाग पर कैसे हमला करता है?

Nipah virus outbreak के दौरान सबसे बड़ा खतरा इसके द्वारा पैदा होने वाला एन्सेफेलाइटिस (Brain Swelling) होता है।

दिमाग पर असर:

  • वायरस सीधे सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है
  • दिमाग में सूजन आ जाती है
  • याददाश्त कमजोर हो सकती है
  • बेहोशी और कोमा की स्थिति बन सकती है

गंभीर मामलों में मरीज की मौत का खतरा भी बढ़ जाता है।


निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण

निपाह वायरस के लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे लग सकते हैं, लेकिन ये तेजी से गंभीर हो जाते हैं।

सामान्य लक्षण:

  • तेज बुखार
  • सिर दर्द
  • उल्टी और मतली
  • गले में खराश

गंभीर लक्षण:

  • चक्कर आना
  • मानसिक भ्रम
  • दौरे पड़ना
  • बेहोशी

लक्षण दिखते ही तुरंत मेडिकल जांच बेहद ज़रूरी है।


निपाह वायरस से कैसे रहें सुरक्षित?

Nipah virus outbreak के दौरान बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है।

सुरक्षा के उपाय:

  • कटे या गिरे हुए फल खाने से बचें
  • बिना उबाला हुआ खजूर का रस न पिएं
  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचें
  • हाथों को बार-बार साबुन से धोएं
  • अस्पताल में PPE और मास्क का इस्तेमाल करें

क्या निपाह वायरस का इलाज या वैक्सीन है?

फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई पक्की वैक्सीन या एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। इलाज मुख्य रूप से

  • लक्षणों को कंट्रोल करने
  • मरीज को सपोर्टिव केयर देने

पर आधारित होता है।


सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तैयारी

स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकारें

  • कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग
  • आइसोलेशन
  • सर्विलांस
  • और टेस्टिंग

के ज़रिए स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही हैं।



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