Trump Greenland crisis से डेनमार्क में संकट | Trump Greenland Crisis
वेनेजुएला पर हालिया हमले के बाद अमेरिका की वैश्विक रणनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। इसी बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों ने डेनमार्क की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, डेनमार्क सरकार इस पूरे घटनाक्रम के बाद ‘क्राइसिस मोड’ में चली गई है।
ग्रीनलैंड पर फिर क्यों चर्चा?
ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। ट्रंप पहले भी अपने कार्यकाल के दौरान ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जता चुके हैं। अब वेनेजुएला हमले के बाद अमेरिका की आक्रामक विदेश नीति के संकेतों ने एक बार फिर Trump Greenland crisis को सुर्खियों में ला दिया है।
डेनमार्क की बढ़ी चिंता
डेनमार्क के अधिकारियों का मानना है कि ग्रीनलैंड को लेकर किसी भी तरह का दबाव न सिर्फ यूरोपीय सुरक्षा बल्कि नाटो (NATO) के संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि कूटनीतिक स्तर पर हाई-लेवल मीटिंग्स शुरू कर दी गई हैं।
वैश्विक राजनीति पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख अपनाता है, तो इससे रूस, चीन और यूरोपीय देशों के साथ रिश्तों में नया तनाव पैदा हो सकता है। वेनेजुएला संकट के साथ इस मुद्दे का जुड़ना अंतरराष्ट्रीय राजनीति को और जटिल बना रहा है।
आगे क्या?
फिलहाल डेनमार्क स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है। वहीं, ट्रंप की ओर से कोई आधिकारिक नीति बयान न आने तक यह मामला केवल कूटनीतिक अटकलों तक सीमित है, लेकिन Trump Greenland crisis आने वाले दिनों में बड़ा अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन सकता है।







