NASA Artemis program मून रॉकेट में फिर फ्यूल लीक, 3 साल की तैयारी के बाद भी क्यों बनी समस्या?
NASA का Artemis Moon Mission अमेरिका का सबसे महत्वाकांक्षी चंद्र कार्यक्रम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य इंसानों को दोबारा चांद पर भेजना है। लेकिन एक बार फिर Artemis Moon Rocket में सामने आई fuel leak की समस्या ने इस मिशन की टाइमलाइन और तकनीकी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हैरानी की बात यह है कि NASA के पास इस समस्या को ठीक करने के लिए लगभग 3 साल का समय था, इसके बावजूद ईंधन रिसाव की दिक्कत पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई।
NASA Artemis program| ईंधन रिसाव की समस्या क्या है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Artemis रॉकेट के liquid hydrogen fuel system में बार-बार लीक देखी जा रही है।
- यह समस्या लॉन्च से ठीक पहले टेस्टिंग के दौरान सामने आती है
- सुरक्षा कारणों से हर बार लॉन्च टालना पड़ता है
- हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील होता है, इसलिए जोखिम काफी बड़ा है
3 साल में क्यों नहीं हो पाई पूरी मरम्मत?
विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी कई वजहें हो सकती हैं:
- जटिल रॉकेट डिजाइन: Space Launch System (SLS) अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है
- पुरानी तकनीक और नए सिस्टम का मिश्रण
- अत्यधिक सुरक्षा मानक, जहां छोटी गड़बड़ी भी स्वीकार्य नहीं
- ग्राउंड टेस्टिंग और वास्तविक लॉन्च परिस्थितियों में अंतर
इन कारणों से बार-बार फिक्स करने के बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही।

Artemis लॉन्च पर क्या पड़ेगा असर?
ईंधन रिसाव की वजह से Artemis launch delay की आशंका लगातार बनी हुई है।
NASA पहले ही कई बार लॉन्च शेड्यूल में बदलाव कर चुका है, जिससे
- मिशन की लागत बढ़ रही है
- अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की प्लानिंग प्रभावित हो रही है
- NASA की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं
चांद मिशन का भविष्य
इसके बावजूद NASA का कहना है कि Artemis Program को लेकर उनकी प्रतिबद्धता मजबूत है।
- Artemis-II में इंसानों को चांद के चारों ओर भेजने की योजना
- Artemis-III के जरिए चंद्र सतह पर लैंडिंग का लक्ष्य
- भविष्य में स्थायी मून बेस की तैयारी
NASA का दावा है कि हर तकनीकी समस्या से सीख लेकर सिस्टम को और मजबूत बनाया जा रहा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि
“इतने बड़े और जटिल अंतरिक्ष मिशनों में तकनीकी चुनौतियाँ आना स्वाभाविक है, लेकिन बार-बार सामने आ रही फ्यूल लीक की समस्या NASA के लिए चिंता का संकेत बनती जा रही है।”







