‘पराशक्ति’ को लेकर इंटरनेट पर गुस्सा, Sivakarthikeyan Parasakthi review reaction“Unbearable”, बोले– ‘धुरंधर दोबारा देख लेते’

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Sivakarthikeyan Parasakthi Review Reaction

Sivakarthikeyan Parasakthi review reaction इंटरनेट पर ट्रोल हुई ‘पराशक्ति’, दर्शकों की तीखी प्रतिक्रिया

शनिवार, 10 जनवरी को सिनेमाघरों में फिल्म ‘पराशक्ति’ (Parasakthi) रिलीज हो गई है। सुधा कोंगरा द्वारा निर्देशित यह तमिल भाषा की ‘हिस्टोरिकल पॉलिटिकल ड्रामा’ फिल्म 1960 के दशक के मद्रास पर आधारित है। फिल्म में हिंदी विरोधी आंदोलनों के दौरान तमिलनाडु के सामाजिक-राजनीतिक माहौल को दिखाया गया है।

फिल्म में शिवकार्तिकेयन, रवि मोहन, अथर्व और श्रीलीला मुख्य भूमिकाओं में हैं। इनके अलावा कुलप्पुली लीला, प्रकाश बेलावाड़ी, देव रामनाथ, पृथ्वी राजन और गुरु सोमसुंदरम भी अहम किरदारों में नजर आ रहे हैं।

फिल्म देखने के बाद कई दर्शकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं। हालांकि, शुरुआती रुझान बताते हैं कि फिल्म दर्शकों को प्रभावित करने में विफल रही है। आइए जानते हैं दर्शकों का क्या कहना है:

दर्शकों की प्रतिक्रियाएं:

  • “नाकाबिल-ए-बर्दाश्त” अनुभव: एक दर्शक ने फिल्म को “असहनीय” (UNBEARABLE) करार देते हुए लिखा, “निर्देशक सुधा कोंगरा की कोशिश तो दिखती है, लेकिन कमजोर लेखन ने इसे एक निराशाजनक फिल्म बना दिया है। लगातार बढ़ा-चढ़ाकर किया गया प्रेजेंटेशन, चीख-पुकार और बेवजह का बिल्ड-अप दर्शकों को चिढ़ाता है। फिल्म का क्रियान्वयन (execution) त्रुटिपूर्ण है। देखने की सलाह बिल्कुल नहीं।”
  • उबाऊ और लंबी कहानी: एक समीक्षक ने विस्तार से लिखा, “एक उबाऊ पीरियड ड्रामा जिसकी नीयत तो ईमानदार है, लेकिन थका देने वाला और लंबा वर्णन आपके धैर्य की परीक्षा लेता है! फिल्म शुरुआत में अपने प्रामाणिक पीरियड सेटअप (1960 के दशक का माहौल) से ध्यान खींचती है। हालांकि, धीमी कहानी और नीरस लव ट्रैक पहले हाफ पर हावी रहते हैं। इंटरवल के बाद फिल्म अंतहीन रूप से खिंचती है, जहां सुविधाजनक लेखन और खींचे हुए सीक्वेंस धैर्य की परीक्षा लेते हैं। भाषा आंदोलन से जुड़ी भावनाएं सतही लगती हैं और प्रभावी ढंग से दिल को नहीं छू पातीं।”

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