JioStar Strategy Change: टीवी और डिजिटल सेल्स को अलग कर पारंपरिक मॉडल की ओर वापसी

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JioStar Strategy Change

JioStar Strategy Change: टीवी और डिजिटल सेल्स अलग, पारंपरिक मॉडल की ओर वापसी

भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिला है। जियोस्टार ने अपने बिजनेस मॉडल में अहम परिवर्तन करते हुए टीवी और डिजिटल विज्ञापन बिक्री (Sales Operations) को अलग-अलग करने का फैसला लिया है। यह कदम उस दौर में उठाया गया है जब मीडिया कंपनियां तेजी से बदलते विज्ञापन बाजार और दर्शकों की खपत (Consumption Patterns) के अनुसार अपनी रणनीतियों को फिर से संतुलित कर रही हैं।


JioStar Strategy Change| क्यों लिया गया यह फैसला?

पिछले कुछ वर्षों में मीडिया कंपनियों ने डिजिटल और टीवी प्लेटफॉर्म की सेल्स को एकीकृत (Integrated Sales Model) कर दिया था, ताकि विज्ञापनदाताओं को एक ही छत के नीचे मल्टी-प्लेटफॉर्म समाधान मिल सके।
लेकिन अब बाजार में स्पष्ट अंतर दिखने लगा है:

  • टीवी दर्शकों का व्यवहार डिजिटल दर्शकों से अलग है
  • विज्ञापनदाताओं की जरूरतें प्लेटफॉर्म-विशिष्ट हो गई हैं
  • डिजिटल में डेटा-आधारित विज्ञापन की मांग बढ़ी है
  • टीवी अब भी मास-रीच (Mass Reach) का सबसे मजबूत माध्यम है

इन्हीं बदलावों को देखते हुए कंपनी ने पारंपरिक लेकिन अधिक फोकस्ड मॉडल अपनाने का निर्णय लिया है।


अलग-अलग सेल्स स्ट्रक्चर से क्या होगा फायदा?

टीवी और डिजिटल सेल्स को अलग करने से कंपनी अब दोनों माध्यमों पर अधिक लक्षित (Targeted) रणनीति लागू कर सकेगी।

टीवी बिजनेस के लिए

  • बड़े ब्रांड कैंपेन और इवेंट-आधारित विज्ञापन पर फोकस
  • फैमिली ऑडियंस और रीजनल मार्केट की बेहतर पकड़
  • स्पॉन्सरशिप और हाई-वैल्यू स्लॉट्स से रेवेन्यू बढ़ाने की योजना

डिजिटल बिजनेस के लिए

  • डेटा-ड्रिवन एडवरटाइजिंग मॉडल मजबूत होगा
  • परफॉर्मेंस मार्केटिंग और प्रोग्रामेटिक एड्स को बढ़ावा
  • युवा दर्शकों और ऑन-डिमांड कंटेंट उपभोक्ताओं पर फोकस

JioStar Strategy Change| बदलते मीडिया इकोसिस्टम का असर

मीडिया इंडस्ट्री तेजी से हाइब्रिड मॉडल की ओर बढ़ रही है, जहां:

  • टीवी ब्रांड बिल्डिंग का माध्यम बना हुआ है
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म मापनीय (Measurable) परिणाम देते हैं
  • विज्ञापनदाता अब “वन-साइज़-फिट्स-ऑल” मॉडल से हट रहे हैं

ऐसे में अलग सेल्स टीम्स प्लेटफॉर्म-विशेष रणनीतियां बनाकर बेहतर रेवेन्यू ऑप्टिमाइजेशन कर सकती हैं।


विज्ञापन बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

विज्ञापन बाजार अब पहले से ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो चुका है।
ब्रांड्स चाहते हैं:

  • टीवी पर व्यापक दृश्यता (Visibility)
  • डिजिटल पर सटीक टार्गेटिंग
  • ROI आधारित मीडिया प्लानिंग
  • रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स

इस नई संरचना से कंपनी विज्ञापनदाताओं को अधिक कस्टमाइज्ड समाधान देने की स्थिति में आ सकती है।


क्या यह पारंपरिक मॉडल की वापसी है?

विशेषज्ञ इसे “पुराने मॉडल की वापसी” नहीं बल्कि री-डिजाइन्ड ट्रैडिशनल स्ट्रक्चर मान रहे हैं।
दरअसल, यह कदम डिजिटल विस्तार के बाद संतुलन बनाने की कोशिश है—जहां दोनों माध्यम अपनी-अपनी ताकत के साथ काम करेंगे।


इंडस्ट्री के लिए क्या संकेत?

यह बदलाव पूरे मीडिया सेक्टर के लिए एक संकेत हो सकता है कि:

  • प्लेटफॉर्म-विशिष्ट रणनीतियां फिर से महत्व पा रही हैं
  • टीवी अभी भी विज्ञापन बाजार का बड़ा स्तंभ है
  • डिजिटल ग्रोथ जारी रहेगी, लेकिन अलग पहचान के साथ

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