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West Bengal SIR Case| पश्चिम बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट में उठा सवाल, ‘तार्किक विसंगतियां विज्ञान को चुनौती देती हैं’ चुनाव आयोग

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7 मतदाता: जिनके 100 से अधिक बच्चे हैं।

10 मतदाता: जिनके 50 से अधिक बच्चे हैं।

इसके अलावा:

4,59,054 मामले ऐसे मिले हैं जहाँ एक मतदाता के 5 से अधिक बच्चे हैं।

2,06,056 मामले ऐसे हैं जहाँ पश्चिम बंगाल में एक मतदाता के 6 से अधिक बच्चे हैं।

  1. “मैपिंग” और जांच का आधार

मैपिंग (Mapping): यह आयोग द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला तकनीकी शब्द है, जिसका उपयोग मतदाता की वंशावली को 2002 की मतदाता सूची से जोड़ने (लिंक करने) के लिए किया जाता है।

आयोग ने निर्णय लिया है कि जिन मामलों में छह या उससे अधिक लोगों ने खुद को एक व्यक्ति से मैप किया है, उनकी लिंकेज की वैधता की गहन जांच की जाएगी।

NFHS-5 डेटा का संदर्भ: आयोग ने तर्क दिया कि 2019-2021 के NFHS-5 सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में औसत परिवार का आकार 4.4 है (यानी औसतन 2-3 बच्चे)। ऐसे में एक माता-पिता से 50 से अधिक मतदाताओं का जुड़ा होना संदिग्ध है।

उम्र का अंतर: माता-पिता और बच्चों के बीच 50 साल के अंतर को भी एक “तार्किक विसंगति” माना गया है, क्योंकि 45 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं की प्रजनन दर नगण्य हो जाती है।

  1. विसंगति का मतलब “हटाना” (Deletion) नहीं है आयोग ने स्पष्ट किया कि “तार्किक विसंगति” का पता चलने का मतलब मतदाता का नाम हटाना नहीं है, बल्कि:

यह केवल सत्यापन के लिए नोटिस जारी करने का आधार बनता है।

नोटिस का उद्देश्य विसंगति को स्पष्ट करना या इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) की संतुष्टि के लिए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना है।

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की उन दावों वाली “फील्ड रिपोर्ट्स” को सिरे से नकार दिया, जिनमें कहा गया था कि प्रभावित मतदाता मुख्य रूप से महिलाएं और अल्पसंख्यक हैं या कि लगभग 90% मामलों की वजह किसी “एल्गोरिदमिक त्रुटि” को बताया गया है।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और आंकड़े

16 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में 58 लाख मतदाताओं को बाहर रखा गया (अनुपस्थिति, मृत्यु, स्थायी स्थानांतरण, और दोहरी प्रविष्टि के कारण)। आयोग ने कहा कि इन्हें “विलोपन” (deletions) नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह घर-घर सर्वेक्षण के बाद “गैर-समावेशन” (non-inclusion) है।

यह प्रक्रिया 80,681 बीएलओ (BLO), 7,000+ एईआरओ (AERO), 294 ईआरओ (ERO) और 4,000+ माइक्रो-ऑब्जर्वर की मदद से की गई।

नोटिस चरण 16 दिसंबर, 2025 से शुरू हुआ और 7 फरवरी, 2026 तक जारी रहेगा।

  1. डिजिटल निर्देश और सुनवाई में पारदर्शिता |West Bengal SIR Case

राजनीतिक एजेंटों (BLAs) की उपस्थिति पर रोक: आयोग ने सत्यापन सुनवाई के दौरान राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) की उपस्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई। आयोग का तर्क है कि सुनवाई अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) होती है और केवल संबंधित व्यक्तियों के लिए होती है।

West Bengal SIR Case|पश्चिम बंगाल में 6 राष्ट्रीय और 2 राज्य पार्टियां हैं। यदि सभी 8 BLA सुनवाई में मौजूद रहेंगे, तो माहौल अराजक हो जाएगा और प्रक्रिया में देरी होगी।

  1. सुधार का अवसर आयोग ने आश्वासन दिया कि यदि कोई मतदाता गलती से छूट गया है, तो वह पिछले मतदाता सूची के साथ लिंकेज का प्रमाण प्रस्तुत कर सकता है। ऐसे मामलों में उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाना अनिवार्य होगा।
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