Tejashwi Yadav RJD Leadership|RJD में तेजस्वी यादव का बढ़ता कद: लालू के फैसले से रोहिणी और तेज प्रताप क्यों हुए नाराज़?

Tejashwi Yadav RJD Leadership| RJD में तेजस्वी यादव का बढ़ता कद: लालू के फैसले से रोहिणी और तेज प्रताप क्यों नाराज़?

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में इन दिनों तेजस्वी यादव का कद लगातार बढ़ता जा रहा है। पार्टी के अंदर और बाहर यह साफ दिखाई देने लगा है कि लालू प्रसाद यादव ने भविष्य की कमान तेजस्वी के हाथों सौंपने का मन बना लिया है। लेकिन यही फैसला परिवार और पार्टी दोनों स्तरों पर असहजता का कारण बन गया है। खासतौर पर रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप यादव इस निर्णय से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे।


तेजस्वी यादव क्यों बनते जा रहे हैं पार्टी का चेहरा| Tejashwi Yadav RJD Leadership

पिछले कुछ वर्षों में तेजस्वी यादव ने खुद को एक परिपक्व और सक्रिय नेता के तौर पर स्थापित किया है।

  • विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका
  • चुनावी अभियानों में आक्रामक रणनीति
  • युवा वोटर्स के बीच मजबूत पकड़

इन सब वजहों से पार्टी नेतृत्व को लगने लगा है कि तेजस्वी ही RJD को आगे ले जा सकते हैं।


Tejashwi Yadav RJD Leadership| लालू प्रसाद यादव का स्पष्ट संदेश

स्वास्थ्य कारणों और बदलते राजनीतिक हालात के बीच लालू प्रसाद यादव अब पार्टी की रोजमर्रा की राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं। ऐसे में उन्होंने संकेतों-संकेतों में यह साफ कर दिया है कि तेजस्वी यादव ही उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी हैं

पार्टी के अहम फैसलों में तेजस्वी की भूमिका लगातार बढ़ना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।


रोहिणी और तेज प्रताप को क्यों नहीं रास आया फैसला?

तेज प्रताप यादव

तेज प्रताप यादव पहले भी कई बार पार्टी लाइन से हटकर बयान दे चुके हैं। उन्हें लगता है कि पार्टी में उनकी भूमिका सीमित होती जा रही है। तेजस्वी को प्राथमिकता दिए जाने से उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को झटका लगा है।

रोहिणी आचार्य

हालांकि रोहिणी आचार्य सक्रिय राजनीति में कम दिखाई देती हैं, लेकिन पारिवारिक और भावनात्मक स्तर पर तेजस्वी के बढ़ते दबदबे को लेकर असंतोष की चर्चा होती रही है।


परिवार बनाम पार्टी की राजनीति

RJD में यह पहली बार नहीं है जब परिवार और राजनीति टकरा रहे हों। लालू परिवार के भीतर सत्ता संतुलन हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। तेजस्वी का बढ़ता कद पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकता है, लेकिन पारिवारिक असहमति भविष्य में चुनौती बन सकती है


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