भारत में ईंधन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि देश तेजी से 100% एथेनॉल आधारित ईंधन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका मानना है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम हो सकती है, जिससे न सिर्फ प्रदूषण घटेगा बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी।
एथेनॉल क्या है और क्यों बढ़ रहा इसका इस्तेमाल?
- एथेनॉल एक जैविक ईंधन (Biofuel) है, जो मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है।
- यह पेट्रोल की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है और पर्यावरण के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है।
- भारत सरकार पहले ही E20 (20% एथेनॉल मिश्रण) का लक्ष्य तय कर चुकी है, जिसे कई राज्यों में लागू किया जा रहा है।

क्या सच में खत्म हो जाएगा पेट्रोल-डीजल का दौर?
विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल पूरी तरह तुरंत बंद नहीं होंगे, लेकिन आने वाले वर्षों में इनकी खपत धीरे-धीरे कम हो सकती है।
- सरकार का लक्ष्य है कि वैकल्पिक ईंधन (Alternative Fuel) को बढ़ावा दिया जाए।
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV), 100% एथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे विकल्प भविष्य में मुख्य भूमिका निभा सकते हैं।
- इससे देश की विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
किसानों और आम लोगों को क्या होगा फायदा?
- किसानों को फसल से अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिलेगा।
- ईंधन की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना बढ़ेगी।
- प्रदूषण कम होने से स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
- देश में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
भविष्य की तैयारी: ऑटोमोबाइल कंपनियां भी तैयार
भारत की कई वाहन कंपनियां पहले से ही फ्लेक्स-फ्यूल (Flex Fuel) इंजन पर काम कर रही हैं, जो एथेनॉल और पेट्रोल दोनों से चल सकते हैं। आने वाले समय में बाजार में ऐसी गाड़ियां ज्यादा देखने को मिल सकती हैं।
भारत तेजी से स्वच्छ और सस्ते ईंधन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। 100% एथेनॉल की योजना से देश में ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने जैसे कई बड़े बदलाव संभव हैं। हालांकि पेट्रोल-डीजल तुरंत खत्म नहीं होंगे, लेकिन भविष्य में इनके विकल्प तेजी से बढ़ते नजर आ रहे हैं।







