इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पेयजल आपूर्ति से फैली बीमारी के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। इस प्रकरण में नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने के आदेश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने नगर निगम में आवश्यक पदों पर तत्काल नियुक्तियां करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
CM मोहन यादव ने X पर दी जानकारी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि उन्होंने सुबह मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इंदौर के दूषित पेयजल मामले की समीक्षा की।
अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर चर्चा के बाद यह कार्रवाई तय की गई।
उन्होंने कहा कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और जल वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेशभर में सुधारात्मक कदम
मुख्यमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि इंदौर की दुखद घटना के बाद पूरे प्रदेश में सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
इसके लिए सभी 16 नगर निगमों के महापौर, अध्यक्ष, आयुक्त, जिला कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग, नगरीय विकास विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक बुलाई गई है, जिसमें जल आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
इंदौर में मौतों का आंकड़ा 15
दूषित पानी से फैली बीमारी के कारण इंदौर में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। कई इलाकों में घरों तक गंदा पानी सप्लाई होने से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े।
हालांकि प्रशासन ने अब तक केवल चार मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है।
मामला पहुंचा कोर्ट तक
यह मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। दूषित जल आपूर्ति को लेकर तीन जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है।
मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित है।







